Saturday, March 23, 2013

हास्य कविता --हँसमुखजी बोले...



हँसमुखजी बोले मित्र से
कल तुम मेरे घर आये थे
मैं तुम्हारे घर गया था
तुम्हें मैं घर पर नहीं मिला
मुझे तुम घर पर नहीं मिले
मित्र बेचैन हो कर बोला
क्यों राई का पहाड़ बना रहे हो
आगे बोलो फिर क्या हुआ
हँसमुखजी बोले सब्र रखो
सुनो तो सही
मेरे घर भी ताला लगा था
तुम्हारे
घर पर भी ताला लगा था
मित्र बोला
क्यों हैरान कर रहे हो
आगे क्या हुआ वो बताओ
हँसमुखजी बोले
आगे क्या होना था
तुम अपने घर लौट गए
मैं अपने घर लौट गया
दोनों की इच्छा पूरी नहीं हुई
मिलना कल चाहते थे
मिलना आज हुआ
43-43-23-01-2013
हास्य,हास्य कविता,हँसमुखजी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  

Saturday, May 12, 2012

"निरंतर" की कलम से.....: हास्य कविता-पत्नी तो पत्नी होती,

"निरंतर" की कलम से.....: हास्य कविता-पत्नी तो पत्नी होती,: पत्नी तो पत्नी होती पती की अर्धांगिनी साले साली की बहन होती शादी से पहले इच्छा बाद में मजबूरी होती पत्नी जब गुस्से में होती पती की हिम्मत ...

"निरंतर" की कलम से.....: हास्य कविता-मैं बाबा बनना चाहता हूँ

"निरंतर" की कलम से.....: हास्य कविता-मैं बाबा बनना चाहता हूँ: मैं बाबा बनना चाहता हूँ नाम के आगे पूज्य,श्री और भगवान् लगाना चाहता हूँ परमात्मा को पाने के नुस्खे बताना चाहता हूँ ऊंचे आसन पर बैठ बात ज़म...

Tuesday, April 17, 2012

"निरंतर" की कलम से.....: हास्य कविता-निरंतर फक्कड़ रहा हूँ , फक्कड़ ही रह ल...

"निरंतर" की कलम से.....: हास्य कविता-निरंतर फक्कड़ रहा हूँ , फक्कड़ ही रह ल...: चार मकान , चार गाडी खरीद लूं देश विदेश की सैर कर लूं कुछ सोना , चांदी खरीद लूं धनवानों में गिनती होगी आगे पीछे भीड़ होगी मेरी भी पूछ होगी छा...

Friday, April 13, 2012

निरंतर कह रहा .......: हास्य कविता- कितना खुशगवार था वो लम्हा

निरंतर कह रहा .......: हास्य कविता- कितना खुशगवार था वो लम्हा: कितना खुशगवार था वो लम्हा जब उसने मुस्करा कर मेरी तरफ देखा   करीब आकर मेरा पता पूछा दिल खुश हुआ जब रंग बिरंगे कागज़ में लिपटा एक तोहफा हा...

निरंतर कह रहा .......: हास्य कविता-सर्द रात में उल्लू बोला

निरंतर कह रहा .......: हास्य कविता-सर्द रात में उल्लू बोला: हँसमुखजी ने कविता पाठ करना प्रारम्भ किया सर्द रात में उल्लू बोला एक मनचले श्रोता ने आवाज़ लगाई आज गर्मी की शाम को मंच से बोल रहा है हँसमुख...

Sunday, April 8, 2012

"निरंतर" की कलम से.....: हास्य कविता-बात क्या मुंह में, बैठ कर सुनोगे

"निरंतर" की कलम से.....: हास्य कविता-बात क्या मुंह में, बैठ कर सुनोगे: हंसमुख जी दन्त चिकित्सक थे दांतों का इलाज करते थे पहले मुंह खुलवाते थे फिर बात करते थे एक दिन दर्द से पीड...

"निरंतर" की कलम से.....: हास्य कविता,-बगैर जूते खाए,साबुत घर लौट आए हो

"निरंतर" की कलम से.....: हास्य कविता,-बगैर जूते खाए,साबुत घर लौट आए हो: पचास की उम्र थी कपड़ों पर इत्र बालों में खिजाब लगा कर हाथ में गुलाब का फूल आँखों पे नज़र का मोटा चश्मा लगाए बन ठन कर , मुस्काराते हुए बहुत उम्...

Monday, March 19, 2012

निरंतर कह रहा .......: हँसमुखजी ने नए पोज़ में फोटो खिचवाई (हास्य कविता)

निरंतर कह रहा .......: हँसमुखजी ने नए पोज़ में फोटो खिचवाई (हास्य कविता): हँसमुखजी पर फोटो खिचवाने का भूत सवार था  दिन भर सपनों में खोये रहते थे किस नए पोज़ में फोटो खिचवाएं निरंतर सोचते रहते थे एक दिन पहुँच गए कि...

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निरंतर कह रहा .......: खिली धूप बरसात के बाद-हास्य रचना-(मित्रता समाप्त क...: खिली धूप बरसात के बाद मुस्कान आयी होठों पर बरसों की उदासी के बाद दिखा चेहरा तुम्हारा चेहरा खुद का सैकड़ों बार शीशे में देखने के बाद समझते थ...