Monday, September 19, 2011

तुम्हारी सूरत फिर रुआंसी हो जायेगी (हास्य कविता)

सालों बाद
मोहल्ले में निरंतर
हो रही चोरियां रुक गयी
जनता आश्चर्य में पड़ गयी
पर हंसमुख जी को
बात समझ नहीं आयी
फ़ौरन थानेदार के पास
जा कर गुहार लगायी
अपनी चिंता बतायी
मोटे थानेदार के  चेहरे पर
तरबूज की फांक सी
मुस्काराहट आयी
हंसमुख जी को हकीकत
समझायी
किश्त मिलनी बंद हो गयी
 इसलिए चोर की पकडायी
फिर ठुकायी हुयी 
चिंता की कोई बात नहीं
दुसरे गैंग से
किश्त तय हो गयी
कल से चोरियाँ फिर
चालू हो जायेगी
मेरी मुस्कराहट
हँसी में बदल जायेगी
तुम्हारी सूरत फिर
रुआंसी हो जायेगी    
20-09-2011
1529-100-09-11

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