Sunday, September 4, 2011

एक दुलत्ती मारूंगा नानी याद कराऊंगा

मेरे मित्र
हंसमुखजी बोले मुझ से
यार निरंतर
गधे पर कविता
क्यों नहीं लिखते
मैं बोला रे हंसमुख
अब लिखूंगा
तेरी हर आदत का
खुल कर बयान करूंगा
हंसमुखजी नाराज़ हो गए
कहने लगे
मुझे गधा कह रहे हो
एक दुलत्ती मारूंगा
नानी याद कराऊंगा
मैंने कहा दुलत्ती मत
मारना
अभी तो सिर्फ मुझे पता है
फिर सब को पता
चल जाएगा
कुछ करना ही है तो
ढेंचू ढेंचू करो
कम से कम
बिरादरी वालों को तो
बुला लो
उन्हें भी तुम्हारी
हकीकत का पता चल
जाएगा
हंसमुखजी क्रोध में बोले
मैं उन्हें सत्य बता दूंगा
उन्हें मैंने नहीं तुमने
बुलाया
दुलत्ती मारने की जगह
ढेंचू ढेंचू
करने को कहा
26-07-2011
1235-115-07-11

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